मौसम विभाग ने हमारे शहर में सिर्फ हलके बादल का बोला था। लेकिन यहां खुल कर बारिश हूई। गर्मी से झुलसी प्यासी धरती पर बारिश की हर बूंद प्यार बन बरसी। एक सौंधी की खूशबू आई और फिर धरती बारिश में डूब गई। मानों उसे पानी से और पानी को उससे प्यार हो गया हो। लेकिन ये बारिश बंद होगी, धरती कुछ समय तक नम होगी। फिर उपर से सूख जाएगी और प्यार इसके अंतर में बसेगा। उस प्यार से कई जीवन सींच जाएगी ये।
प्यार ऐसा ही होता बिना चेतावनी कब, कहां, कैसे और किससे हो जाएगा ये आप नहीं बता पाएंगे। उम्र, धर्म, औहदों, जात, रंग से परे है ये। समाज के सभी नियमों से उपर। हर मोह से परे। हां मोह प्रेम नहीं है।
प्रेम या प्यार, किसी को सुख देने की कोशिश है। मोह सुख प्राप्त करने का जरिया।
हां प्यार में आंखें हर पल प्यार को ढूंढेंगीं। अजीब सी बेचैनी भी होगी। और अगर ये एक तरफा है तो कुछ न कह पाने की खलिश भी रहेगी।
लेकिन प्यार एक एहसास है और उस एहसास को जाहिर किया जाए ये जरूरी नहीं। उस एहसास में किसी को बांधने की कोशिश की जाए ये बेवजह है।
बंधन हमें जिम्मेदारियों से बांधते हैं, प्यार हर रूप में आज़ादी देता है। जिम्मेदारियां गलत नहीं लेकिन प्यार में ये खुद ब खुद निभ जाती हैं, निभानी पड़ती नहीं हैं।
जहां, जब और जैसे ही हम प्यार से रिवायती होते हैं, जैसे जैसे हम उसे संसार के बनाए नियमों में जकड़ते जाते हैं, वैसे वैसे प्यार नमी खोता जाता है। बेड़ियों में कैद हुआ प्यार ठीक उसी बंजर धरती सा होता है, जिसे अब शायद बारिश का इंतजार भी नहीं ।
प्यार के इस खूबसूरत से एहसास को बिना मोह के जीने में ही अनंद की अनुभूती है। ये एहसास आपको खुबसूरत बनाता है। खुद पर इतराने का मन करता है। गाना गाने का मन करता है। ये आपके मन की पाकीज़गी को कायम रखता है। लोगों को समझ न आने वाला ये प्यार निस्वार्थ होता है। जिससे प्यार है उसे सिर्फ सुख देना है, उससे कोई कामना नहीं रखनी। इसलिए तो कहती हूं जो बंधन में बंध गया वो प्यार नहीं मोह है।
इस प्यार में कुछ खुद ब खुद मिल जाए तो समेट लो, भर लो अपनी झोली। लेकिन नहीं मिले तो गम न करो, क्यों की ये तो है सिर्फ देने के लिए है। राधा और कृष्णा का प्यार हो या फिर मीरा और कृष्णा /या अंग्रेज़ी की सैंकड़ों क्लासिक नोव्लस में लिखा गया प्यार, रोमियो जूलियट से लेकर प्राईड एंड प्रेजुडिस के elizabeth और मिसटर डार्सी का प्यार। या कई ऐसी कहानियां जैसे ढोला मारु और हीर रांझा जो प्यार की मिसाल माने जाते हैं।
प्यार एक ताकत भी है। और होना भी चाहिए जो आपको कमजोर बना दे वो प्यार नहीं मोह है। जो आपको पीछे खींचे वो प्यार नहीं। जिद्द है।
प्यार तो मित्र के जैसा है, जो आपकी खुशी में खुश है, जो आपके साथ में सराबोर है, जो आपकी ज़रूरत है मजबूरी नहीं, जो आपके इर्द गिर्द है हल पल फिर भी आप आज़ाद हैं। प्यार दिशा दिखा सकता है, प्यार राह बन सकता है।
लोग कहते हैं प्यार कई तरह का होता है, नहीं प्यार तो प्यार है हां रिश्ते कई तरह के होते हैं। रिश्ते जो समाज ने बनाएं, वो बंधन जो प्यार को अलग अलग दायरों में बांधते हैं। किसी में आदर और सम्मान का रुप ले लेता है प्यार, तो कहीं ममता और दोस्ती का। लेकिन इन सब में स्वार्थ छिपा है। ऐसे देखा जाए तो बिना दायरों में बंधा प्यार, या फिर आजकल की भाषा में कहें तो no commitments attached वाला प्यार शायद प्यार का सबसे सुलझा और प्योर प्यार है। जहां जो मिल रहा है उसमें खुश हैं और रोज प्यार बांट रहे हैं।
हांलकी आम तौर इसे सही नहीं माना जाता, और वो शायद इसलिए क्यों की इंसान सदियों से प्यार को स्वाभाव की जगह सीखने सिखाने वाला चीज़ मानता है। तभी तो शादी कर दो प्यार अपने आप हो जाएगा ऐसे कहा जाता है।
किसी के साथ रहने से, सालों बिताने से, रिश्ता निभाने से प्यार नहीं होता, रिश्ते तो बिना प्यार के भी हमारे समाज में लाखों लोग निभा रहे हैं। लेकिन वो सब स्वार्थ, मोह, और सामाजिक सोच की वजह से है।
इसिलिए शायद प्यार दोस्ती के इतने करीब है, क्यों की दोस्ती ही वो वाहिद नाता है जो सिर्फ और सिर्फ प्यार की डोर पर खड़ा है, यहां स्वार्थ सिर्फ दोस्त को सुख देने का है। यहां बंधन नहीं, विश्वास है, यहां इच्चाछाएं नहीं अधिकार है, यहां संकोच नहीं, बस प्यार है।