Friday, June 18, 2021

रिश्ते - टेक 2

 जिन्दगी छोटी सी है, और महामारी ने और कुछ नहीं तो ये तो सभी को सिखा दिया है। ऐसे में रिश्ते संभालकर रखना एक बात है और  उन रिशतों से आज़ाद होना जो अपको खोखला कर रहें हैं दूसरी बात और वो रिश्ते बनाना जो आपको खुशी दे रहे हैं तीसरी। 

पिछले दो साल में वैसे तो कई डिवोर्स हुए लोकिन जो याद रह गए और सवाल खड़े गए वो थे दो सबसे अमीर दंप्त्ती के डिवोर्स। इनहोंने ने अपनी 25 - 25 साल पुरानी शादियों को अलविदा कहा। 2019 में जैफ बीजोज़ और मेकिंज़ी स्कॉट और 2021 में बिल गेट्स और मिलिंडा गेट्स। क्या हुआ ऐसा? और जो हुआ क्या वो सालों से चल रहा था? और 25 साल क्यों लग गए एक दूसरे का साथ नहीं निभा पएंगे ये समझने में। 

हमारे देश में तो माता पिता शादी ही ये कह के करा डालते हैं की बुढ़ापे का साथ तो चाहिए, हम नहीं रहेंगे तो किसके साथ रहोगी। कुछ ऐसे अजीबों गरीब तर्क के बीच हम शादी कर लेते हैं। 

मुझे लगता है शादी के लिए कभी भी कोई भी पूरी तरह तैयार नहीं होता। शादी के बाद जिंदगी क्या मोड़ लेगी, किस राह पर चल देगी, अपने दोस्त, अपने सपने, अपने अपने कैसे छूटते चले जाएंगे इसका अंदाज़ा भी नहीं होता। फिर आप उस राह निकल जाते हैं जहां से मुड़ना मुशकिल या नमुमकिन हो जाता है। 

शायद ऐसा ही कुछ हुआ होगा इन बड़ी बड़ी हस्थियों के साथ भी। समाज और जिम्मेदारी के दायरों में ऐसा चर्कव्यूह बनता है की उससे ये लोग निकल भी गए, सेंकड़ों ऐसे हैं जो निकल ही नहीं पाते। 

तो क्या हम एक comfort zone में चले जाते हैं। जहां सिर्फ भोतिक सुख मायने रखते हैं। चीजें, सामान, खाना पीना, लोगों के सामने साथ दिखना इतना आसान हो जाता है। लेकिन अंदर ही अंदर दूरीयां घर कर चुकी होती हैं। ऐसे रिश्ते सिर्फ किसी बड़ी वजह से ही चलाए जा सकते हैं। एक बार की बात है, मैं अपनी एक सहेली से इस पर बात कर रही था। उसका सवाल आज भी मेरे ज़हन में छपा है। किसी के साथ हम जीवन जीने का वादा करते हैं, लकिन अगर वो इंसान अगर मेरी किसी भी ज़रूरत के लिए ज़रूरी नहीं तो मैं उसके साथ क्यों हूं। शारीरिक ज़रूरतें खत्म हो जाती हैं, पैसा आज लड़का हो या लड़की सभी कमा रहे हैं, यहां सबसे अहम होती है emotional जरूरत। प्यार से बस हाथ थाम लेना, कभी मिल कर गले लगा लेना, बातें करना और सुनना, साथ में गाने गाना, साथ में खुले आसमान के नीचे लेट कर तारे गिन्ना। नहीं ये सब फिल्मी नहीं है। इस तरह के प्यार और जज़बे की ज़रूरत होती है एक रिश्ते को। 

एक ऐसा रिश्ता जिसमें आज़ादी हो, साथ हो ....चाहे चुप हों मगर एक साथ हों....एक एहसास हो....सूकून और प्यार हो।     

Monday, May 31, 2021

प्यार और बंधन


मौसम विभाग ने हमारे शहर में सिर्फ हलके बादल का बोला था। लेकिन यहां खुल कर बारिश हूई। गर्मी से झुलसी प्यासी धरती पर बारिश की हर बूंद प्यार बन बरसी। एक सौंधी की खूशबू आई और फिर धरती बारिश में डूब गई। मानों उसे पानी से और पानी को उससे प्यार हो गया हो। लेकिन ये बारिश बंद होगी, धरती कुछ समय तक नम होगी। फिर उपर से सूख जाएगी और प्यार इसके अंतर में बसेगा। उस प्यार से कई जीवन सींच जाएगी ये। 

प्यार ऐसा ही होता बिना चेतावनी कब, कहां, कैसे और किससे हो जाएगा ये आप नहीं बता पाएंगे। उम्र, धर्म, औहदों, जात, रंग से परे है ये। समाज के सभी नियमों से उपर। हर मोह से परे। हां मोह प्रेम नहीं है। 

प्रेम या प्यार, किसी को सुख देने की कोशिश है। मोह सुख प्राप्त करने का जरिया। 

हां प्यार में आंखें हर पल प्यार को ढूंढेंगीं। अजीब सी बेचैनी भी होगी। और अगर ये एक तरफा है तो कुछ न कह पाने की खलिश भी रहेगी।  

लेकिन प्यार एक एहसास है और उस एहसास को जाहिर किया जाए ये जरूरी नहीं। उस एहसास में किसी को बांधने की कोशिश की जाए ये बेवजह है। 

बंधन हमें जिम्मेदारियों से बांधते हैं, प्यार हर रूप में आज़ादी देता है। जिम्मेदारियां गलत नहीं लेकिन प्यार में ये खुद ब खुद निभ जाती हैं, निभानी पड़ती नहीं हैं। 

जहां, जब और जैसे ही हम प्यार से रिवायती होते हैं, जैसे जैसे हम उसे संसार के बनाए नियमों में जकड़ते जाते हैं, वैसे वैसे प्यार नमी खोता जाता है। बेड़ियों में कैद हुआ प्यार ठीक उसी बंजर धरती सा होता है, जिसे अब शायद बारिश का इंतजार भी नहीं । 

प्यार के इस खूबसूरत से एहसास को बिना मोह के जीने में ही अनंद की अनुभूती है। ये एहसास आपको खुबसूरत बनाता है। खुद पर इतराने का मन करता है। गाना गाने का मन करता है। ये आपके मन की पाकीज़गी को कायम रखता है। लोगों को समझ न आने वाला ये प्यार निस्वार्थ होता है। जिससे प्यार है उसे सिर्फ सुख देना है, उससे कोई कामना नहीं रखनी। इसलिए तो कहती हूं जो बंधन में बंध गया वो प्यार नहीं मोह है। 

इस प्यार में कुछ खुद ब खुद मिल जाए तो समेट लो, भर लो अपनी झोली। लेकिन नहीं मिले तो गम न करो, क्यों की ये तो है सिर्फ देने के लिए है। राधा और कृष्णा का प्यार हो या फिर मीरा और कृष्णा /या अंग्रेज़ी की सैंकड़ों क्लासिक नोव्लस में लिखा गया प्यार, रोमियो जूलियट से लेकर प्राईड एंड प्रेजुडिस के elizabeth और मिसटर डार्सी का प्यार। या कई ऐसी कहानियां जैसे ढोला मारु और हीर रांझा जो प्यार की मिसाल माने जाते हैं। 

प्यार एक ताकत भी है। और होना भी चाहिए जो आपको कमजोर बना दे वो प्यार नहीं मोह है। जो आपको पीछे खींचे वो प्यार नहीं। जिद्द है। 

प्यार तो मित्र के जैसा है, जो आपकी खुशी में खुश है, जो आपके साथ में सराबोर है, जो आपकी ज़रूरत है मजबूरी नहीं, जो आपके इर्द गिर्द है हल पल फिर भी आप आज़ाद हैं। प्यार दिशा दिखा सकता है, प्यार राह बन सकता है।

लोग कहते हैं प्यार कई तरह का होता है, नहीं प्यार तो प्यार है हां रिश्ते कई तरह के होते हैं। रिश्ते जो समाज ने बनाएं, वो बंधन जो प्यार को अलग अलग दायरों में बांधते हैं। किसी में आदर और सम्मान का रुप ले लेता है प्यार, तो कहीं ममता और दोस्ती का। लेकिन इन सब में स्वार्थ छिपा है। ऐसे देखा जाए तो बिना दायरों में बंधा प्यार, या फिर आजकल की भाषा में कहें तो no commitments attached वाला प्यार शायद प्यार का सबसे सुलझा और प्योर प्यार है। जहां जो मिल रहा है उसमें खुश हैं और रोज प्यार बांट रहे हैं। 

हांलकी आम तौर इसे सही नहीं माना जाता, और वो शायद इसलिए क्यों की इंसान सदियों से प्यार को स्वाभाव की जगह सीखने सिखाने वाला चीज़ मानता है। तभी तो शादी कर दो प्यार अपने आप हो जाएगा ऐसे कहा जाता है। 

किसी के साथ रहने से, सालों बिताने से, रिश्ता निभाने से प्यार नहीं होता, रिश्ते तो बिना प्यार के भी हमारे समाज में लाखों लोग निभा रहे हैं। लेकिन वो सब स्वार्थ, मोह, और सामाजिक सोच की वजह से है। 

इसिलिए शायद प्यार दोस्ती के इतने करीब है, क्यों की दोस्ती ही वो वाहिद नाता है जो सिर्फ और सिर्फ प्यार की डोर पर खड़ा है, यहां स्वार्थ सिर्फ दोस्त को सुख देने का है। यहां बंधन नहीं, विश्वास है, यहां इच्चाछाएं नहीं अधिकार है, यहां संकोच नहीं, बस प्यार है। 



 




Thursday, May 27, 2021

Relationship


रिश्तों को लेकर लोगों के कई फलसफे हैं। बहुत तरह की सोच है। कोई इनहें बन्धन कहता है तो कोई निभाने की बात करता है। कहीं कज़न्स को पहले सबसे अच्छे दोस्त कहा जाता है, तो कहीं दोस्त भाई या बहन जैसे हैं, ये बोला जाता है। कुछ लोग मानते है की आप जिनके साथ या करीब रहते हैं उनसे रिश्ता बन जाता है, निभ जाता है। शादी, प्यार, परिवार, दुशमनी ये सभी रिश्ते कहलाते हैं। 

तो रिश्ता है क्या? कैसे बनता है? क्या ये सिर्फ मेरी और तुमहारी ज़रूरतों के आधार पर बना? या इसका कोई और मूल है। और अगर है तो क्या और क्यों इसे बन्धन कहा जाता है ? क्या बन्धन से आज़ाद होने की भावना खुद ही नहीं जागती? रिश्ता यानी रिलेशनशिप का आम मतलब  है दो या दो से ज्यादा लोगों में किसी तरह का संबन्ध, जुड़ाव या लेनदेन। रिश्ते भी कई तरह के होते हैं। लेकिन हम बात करेंगे उन रिश्तों की जो दिल से जुड़े होते है। 

जिसमें माता. पिता, भाई, बहन, बच्चों  से रिश्ते सबसे पहले हैं, जो लगभग हमेशा सात रहते हैं। जो शायद आपको सुनते समझते हैं। लेकिन इन सभी में हमेशा, हर किसी के साथ ऐसा होता हो - ये कहना गलत होगा। 
ये तो वो रिश्ते हैं जो सिर्शठी ने हमारे लिए तय किए हैं। तो ये तो निभ ही जाते हैं। लेकिन सबसे मुश्किल होते हैं वो रिश्ते जो हम खुद बनाते हैं। कभी समय के बहाव में, तो कभी समाज के दबाव में। मैं बात कर रही हूं शादी के रिश्ते की। इस रिश्ते को जोड़ रहखने में महनत लगती है, और वो दोनो तरफ से चाहिए होती है। 
सिर्फ प्यार नहीं, इज़्जत देना, एक दूसरे का सम्मान, एक दूसरे को समझना दो लोगों के लिए बेहद जरूरी है। ये वो रिश्ता है जहां दो लोग एक साथ आगे बढ़ सकें - एक के लिए दूसरी को रुकना न पड़े - और रुकना पड़े भी तो समझ, प्यार और दोस्ती के साथ। 

बेहद कमजोर ताने बाने पर सजा ये रिश्ता समाज की देन है। अक्सर समाज और परिवार की खातिर हम इसे निभाते भी जाते हैं। किसी मोड़ पर हाथ छूटते नजर आते हैं तो, कई बार मंजिल साफ दिख रही होती है, तब भी, बस हम निर्णय लेने में चूक जाते हैं। क्योंकी शायद हम सवालों से डरते हैं। या शायद खुद से डरते हैं। खास कर तब जब हमने शादी का फैसला खुद लिया हो। हम इस बात से डरते हैं की हमने जो चुना, जो सोचा, जो पहचाना वो घलत कैसे हो सकता है। अपनी गलती पर सवाल किए जाने  से डरते हैं। लेकिन कब तक डरते रहेंगे। जिस दिन इस रिश्ते में शक, तलाक़ और एक दूसरे पर तंज़ कसने की कहानी शुरु होती है उस दिन से ये रिश्ता गलने लगता है। और फिर कुछ समय बाद इसमें कुछ नहीं बचता सिवाए थकान और मायूसी के। 

तो सोचिए किस तरह के रिश्ते में जीना चहते हैं आप - क्या आप बंधन चहते हैं?