जिन्दगी छोटी सी है, और महामारी ने और कुछ नहीं तो ये तो सभी को सिखा दिया है। ऐसे में रिश्ते संभालकर रखना एक बात है और उन रिशतों से आज़ाद होना जो अपको खोखला कर रहें हैं दूसरी बात और वो रिश्ते बनाना जो आपको खुशी दे रहे हैं तीसरी।
पिछले दो साल में वैसे तो कई डिवोर्स हुए लोकिन जो याद रह गए और सवाल खड़े गए वो थे दो सबसे अमीर दंप्त्ती के डिवोर्स। इनहोंने ने अपनी 25 - 25 साल पुरानी शादियों को अलविदा कहा। 2019 में जैफ बीजोज़ और मेकिंज़ी स्कॉट और 2021 में बिल गेट्स और मिलिंडा गेट्स। क्या हुआ ऐसा? और जो हुआ क्या वो सालों से चल रहा था? और 25 साल क्यों लग गए एक दूसरे का साथ नहीं निभा पएंगे ये समझने में।
हमारे देश में तो माता पिता शादी ही ये कह के करा डालते हैं की बुढ़ापे का साथ तो चाहिए, हम नहीं रहेंगे तो किसके साथ रहोगी। कुछ ऐसे अजीबों गरीब तर्क के बीच हम शादी कर लेते हैं।
मुझे लगता है शादी के लिए कभी भी कोई भी पूरी तरह तैयार नहीं होता। शादी के बाद जिंदगी क्या मोड़ लेगी, किस राह पर चल देगी, अपने दोस्त, अपने सपने, अपने अपने कैसे छूटते चले जाएंगे इसका अंदाज़ा भी नहीं होता। फिर आप उस राह निकल जाते हैं जहां से मुड़ना मुशकिल या नमुमकिन हो जाता है।
शायद ऐसा ही कुछ हुआ होगा इन बड़ी बड़ी हस्थियों के साथ भी। समाज और जिम्मेदारी के दायरों में ऐसा चर्कव्यूह बनता है की उससे ये लोग निकल भी गए, सेंकड़ों ऐसे हैं जो निकल ही नहीं पाते।
तो क्या हम एक comfort zone में चले जाते हैं। जहां सिर्फ भोतिक सुख मायने रखते हैं। चीजें, सामान, खाना पीना, लोगों के सामने साथ दिखना इतना आसान हो जाता है। लेकिन अंदर ही अंदर दूरीयां घर कर चुकी होती हैं। ऐसे रिश्ते सिर्फ किसी बड़ी वजह से ही चलाए जा सकते हैं। एक बार की बात है, मैं अपनी एक सहेली से इस पर बात कर रही था। उसका सवाल आज भी मेरे ज़हन में छपा है। किसी के साथ हम जीवन जीने का वादा करते हैं, लकिन अगर वो इंसान अगर मेरी किसी भी ज़रूरत के लिए ज़रूरी नहीं तो मैं उसके साथ क्यों हूं। शारीरिक ज़रूरतें खत्म हो जाती हैं, पैसा आज लड़का हो या लड़की सभी कमा रहे हैं, यहां सबसे अहम होती है emotional जरूरत। प्यार से बस हाथ थाम लेना, कभी मिल कर गले लगा लेना, बातें करना और सुनना, साथ में गाने गाना, साथ में खुले आसमान के नीचे लेट कर तारे गिन्ना। नहीं ये सब फिल्मी नहीं है। इस तरह के प्यार और जज़बे की ज़रूरत होती है एक रिश्ते को।
एक ऐसा रिश्ता जिसमें आज़ादी हो, साथ हो ....चाहे चुप हों मगर एक साथ हों....एक एहसास हो....सूकून और प्यार हो।